अमेरिका का तेल दबदबा: कौन खरीद रहा सबसे ज्यादा तेल, भारत किस नंबर पर?

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मांदेब जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों..

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच वैश्विक तेल बाजार में हलचल तेज हो गई है। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मांदेब जलडमरूमध्य जैसे अहम समुद्री रास्तों पर खतरा मंडराने से कच्चे तेल की सप्लाई पर दबाव बढ़ गया है। ऐसे हालात में संयुक्त राज्य अमेरिका (अमेरिका) एक मजबूत तेल सप्लायर के रूप में उभरकर सामने आया है।


🌍 अमेरिका से सबसे ज्यादा तेल खरीदने वाले देश (2025)

अमेरिकी एनर्जी इन्फॉर्मेशन एडमिनिस्ट्रेशन (EIA) के अनुसार, 2025 में अमेरिका ने कुल 3.9 अरब बैरल कच्चा तेल और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात किए। टॉप-10 खरीदार देश इस प्रकार हैं:

  1. नीदरलैंड्स – 419 मिलियन बैरल (10.7%)
  2. मेक्सिको – 398 मिलियन बैरल (10.2%)
  3. कनाडा – 324 मिलियन बैरल (8.3%)
  4. साउथ कोरिया – 257 मिलियन बैरल (6.6%)
  5. जापान – 247 मिलियन बैरल (6.3%)
  6. चीन – 238 मिलियन बैरल (6.1%)
  7. भारत – 221 मिलियन बैरल (5.7%)
  8. ब्राज़ील – 133 मिलियन बैरल (3.4%)
  9. यूनाइटेड किंगडम – 124 मिलियन बैरल (3.2%)
  10. स्पेन – 95 मिलियन बैरल (2.4%)

👉 भारत इस सूची में 7वें स्थान पर है।


⚠️ क्यों अहम है मिडिल ईस्ट का तनाव?

  • दुनिया की करीब 25% तेल सप्लाई इन समुद्री मार्गों से गुजरती है
  • तनाव बढ़ने पर 25 मिलियन बैरल प्रतिदिन सप्लाई प्रभावित हो सकती है
  • ईरान समर्थित समूहों की धमकियों से शिपिंग रूट्स जोखिम में हैं

🇺🇸 कैसे बना अमेरिका तेल का सुपरपावर?

  • 2008 के बाद शेल ऑयल और गैस तकनीक से क्रांति
  • तेल निर्यात में 800% की बढ़ोतरी
  • 2020 से लगातार नेट एक्सपोर्टर (आयात से ज्यादा निर्यात)
  • 2006 में जहां भारी आयातक था, अब बड़ा निर्यातक बन चुका है

💰 तेल महंगा तो अमेरिका को फायदा

  • पहले WTI क्रूड: ~$55/बैरल → कैश फ्लो ~$62 अरब
  • अब कीमत: ~$100/बैरल
  • संभावित कैश फ्लो: ~$163 अरब
    👉 यानी लगभग $100 अरब का अतिरिक्त फायदा

📊 निष्कर्ष

वैश्विक तनाव के बावजूद अमेरिका तेल बाजार में सबसे मजबूत खिलाड़ी बनकर उभरा है। भारत जैसे बड़े देश भी अब अमेरिकी तेल पर तेजी से निर्भर हो रहे हैं।


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