जिला परियोजना अधिकारी दर्शन निषाद 51 प्रकांड विद्वानों संग शिवलिंग के पास करेंगे पंचाक्षर मंत्र का जाप
सूजाबाद, वाराणसी
गंगा नदी में मछली पकड़ने के दौरान मछुआरों के जाल में करीब 2500 साल पुराना विशालकाय शिवलिंग फंस गया। शिवलिंग मिलने की खबर आग की तरह फैली और गंगा घाट पर दर्शन के लिए श्रद्धालुओं का तांता लग गया। फिलहाल शिवलिंग को मां गंगा मंदिर के चबूतरे पर लालबाबू निषाद की देखरेख में रखा गया है, जहां पूजा-अर्चना शुरू हो गई है।

सुनील साहनी पुत्र राजेन्द्र साहनी ने अपने साथी जितेन्द्र साहनी, बाबु साहनी, गंगा मांझी व आकाश साहनी के साथ गंगा में महाजाल डाला था। जाल खींचने पर उसमें विशाल शिवलिंग फंसा मिला। मछुआरों ने हिम्मत नहीं हारी और स्थानीय लोगों की मदद से रस्सी के सहारे शिवलिंग को किनारे पर लाया गया।
बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिक राजेश साहनी के अनुसार, “इस प्रकार का प्राचीन शिवलिंग गंगा पार क्षेत्र के किसी भी मंदिर में नहीं है। देखने से यह लगभग ढाई हजार साल पुराना प्रतीत हो रहा है।”
स्थानीय लोगों का मानना है कि अंग्रेजी शासनकाल में मान्यताओं के तहत इसे गंगा में प्रवाहित किया गया होगा। कुछ लोग इसे मां गंगा और महादेव शिव का वास्तविक मिलन बता रहे हैं। गंगा मंदिर के पुजारी लालबाबू निषाद ने बताया कि कुछ लोग इसे वापस पानी में डालना चाहते थे, लेकिन संरक्षण के लिए फिलहाल मंदिर में अस्थायी रूप से स्थापित कर दिया गया है।

चंदौली के मवई निवासी कौशलेश तिवारी की इच्छा पर 15 लोगों ने मेहनत कर शिवलिंग को घाट के ऊपर पहुंचाया। अब यहां रोज प्रसाद वितरण भी हो रहा है।
सूचना मिलते ही जिला परियोजना अधिकारी चंदौली दर्शन निषाद ने मौके का मुआयना किया। उन्होंने कहा, “शिवलिंग मिलना अद्भुत है। देखने से लगता है कि केवल स्पर्श मात्र से ही सात जन्मों का पाप कट जाएगा। इसकी सही जानकारी पुरातात्विक अनुसंधान संस्थान के वैज्ञानिक ही दे पाएंगे।”
उन्होंने बताया कि जल्द ही 51 प्रकांड विद्वानों के साथ शिवलिंग के पास पंचाक्षर मंत्र का जाप किया जाएगा। फिलहाल हर्षोल्लास से पूजा-अर्चना जारी है।
















