वाराणसी (मिर्जामुराद): “जब रक्षक ही भक्षक बन जाए, तो न्याय की उम्मीद धूमिल होने लगती है, लेकिन अंततः जीत सत्य की ही होती है।” कुछ ऐसा ही मामला मिर्जामुराद के बहेड़वा गांव से सामने आया है, जहां गरीबों और असहायों को कानूनी जाल में फंसाने वाले एक अधिवक्ता के मंसूबों पर न्यायालय ने पानी फेर दिया है।
पूरा मामला
बहेड़वा निवासी अधिवक्ता संजय मिश्रा द्वारा महिला पत्रकार विजय लक्ष्मी तिवारी और गांव के अन्य गरीब ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज कराया गया एक मुकदमा न्यायालय द्वारा खारिज (निरस्त) कर दिया गया है। सुनवाई के दौरान माननीय न्यायालय ने अधिवक्ता के कृत्य पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए उन्हें फटकार भी लगाई।
ग्रामीणों ने खोला मोर्चा : 27 से ज्यादा फर्जी मुकदमों का आरोप
गांव वालों का आरोप है कि संजय मिश्रा अपने कानूनी पेशे का दुरुपयोग कर अब तक ग्रामीणों पर 27 से भी अधिक फर्जी मुकदमे दर्ज करा चुका है। ग्रामीणों की व्यथा अब आक्रोश में बदल चुकी है
▪️अपराधिक रिकॉर्ड: बताया जा रहा है कि संजय मिश्रा पर विभिन्न चार थानों में पहले से ही आपराधिक मामले दर्ज हैं।
▪️बार काउंसिल में शिकायत : अधिवक्ता की इन हरकतों से परेशान होकर ग्रामीणों ने बार काउंसिल ऑफ उत्तर प्रदेश (लखनऊ) में उनके रजिस्ट्रेशन को रद्द करने के लिए प्रार्थना पत्र दिया है, जो वर्तमान में विचाराधीन है।
▪️गरीबों का शोषण: स्थानीय निवासियों का कहना है कि अधिवक्ता अपनी कानूनी जानकारी का इस्तेमाल न्याय दिलाने के बजाय मासूमों को डराने और प्रताड़ित करने के लिए कर रहा है।
न्याय की जीत
इस फर्जी मुकदमे के खारिज होने से बहेड़वा गांव के निवासियों ने राहत की सांस ली है। ग्रामीणों का कहना है कि यह उन सभी लोगों के लिए एक बड़ी जीत है जो लंबे समय से इन झूठे आरोपों का दंश झेल रहे थे।> “कानून का कवच दूसरों को सुरक्षा देने के लिए है, उन्हें प्रताड़ित करने के लिए नहीं। न्यायालय का यह फैसला उन लोगों के लिए कड़ा संदेश है जो न्याय प्रणाली का मजाक बनाते हैं।
रिपोर्ट – राहुल मोदनवाल
