जिसका असर सीधे होटल, रेस्तरां, ढाबे और स्ट्रीट वेंडर्स पर पड़ा है। घरेलू रसोई गैस की आपूर्ति सामान्य है, लेकिन अफवाहों के चलते पैनिक बुकिंग बढ़ गई है।
स्ट्रीट फूड वेंडर्स ने बदला मेन्यू
कॉमर्शियल सिलेंडर न मिलने के कारण ठेला और स्ट्रीट फूड विक्रेताओं ने अपने मेन्यू में बदलाव करना शुरू कर दिया है। राजनगर में 18 साल से छोले-भटूरे बेचने वाले चंदू (बस्ती मूल) अब भटूरे की जगह दाल-चावल, सब्जी और तंदूरी नान/रोटी पर ध्यान दे रहे हैं। वे घर से तैयार दाल-सब्जी लाते हैं और दुकान पर तंदूर में नान बनाते हैं। शहर में करीब दो हजार ऐसे दुकानदार मेन्यू बदल चुके हैं।
विजयनगर में टिक्की-गोलगप्पे बेचने वाले रोहित ने टिक्की चाट बंद कर तैयार गोलगप्पे और पापड़ी चाट पर फोकस किया है। इससे सिलेंडर की खपत कम होती है और रोजगार बचता है। दुकानदारों का कहना है कि सरकार जल्द कॉमर्शियल सिलेंडर सप्लाई बहाल करे, ताकि कर्मचारियों की नौकरी सुरक्षित रहे।
होटल और रेस्तरां भी समायोजित कर रहे मेन्यू
होटल और रेस्तरां भी जरूरत के हिसाब से मेन्यू में बदलाव कर रहे हैं। फ्राइड आइटम्स कम करना या कोयला, इलेक्ट्रिक जैसे विकल्पों पर शिफ्ट होना आम है। कुछ जगहों पर ऑपरेशन प्रभावित हो रहे हैं, लेकिन ज्यादातर स्टॉक से काम चल रहा है।
