इस बीच हरौला गांव, नोएडा निवासी एक व्यक्ति ने दावा किया है कि उसका बेटा उपेंद्र, जो इसी फैक्ट्री में काम करता है, बुधवार रात ड्यूटी के लिए घर से निकला था, लेकिन तब से वह लापता है। परिवार ने जिला अस्पताल से लेकर सफदरजंग अस्पताल समेत कई निजी अस्पतालों में उसकी तलाश की, मगर उसका कोई सुराग नहीं मिल पाया है।
उपेंद्र के पिता सरवन कुमार के मुताबिक उनका बेटा पिछले एक साल से फैक्ट्री में काम कर रहा था। बुधवार रात वह खाना खाने के बाद करीब नौ बजे ड्यूटी पर जाने की बात कहकर घर से निकला था। अगले दिन फैक्ट्री में आग लगने की खबर मिलने पर उन्होंने बेटे को फोन किया, लेकिन उसका मोबाइल बंद मिला। इसके बाद परिवार ने उसकी तलाश शुरू की।
सरवन कुमार का कहना है कि वह 20 से ज्यादा अस्पतालों में बेटे के बारे में जानकारी ले चुके हैं, लेकिन अब तक कोई पता नहीं चला। उन्होंने पुलिस से बेटे को सकुशल ढूंढने की मांग की है। वहीं अग्निशमन विभाग और पुलिस का कहना है कि अब तक फैक्ट्री के अंदर से किसी कर्मचारी के फंसे होने की पुष्टि नहीं हुई है।
मुख्य अग्निशमन अधिकारी प्रदीप कुमार चौबे के अनुसार शुरुआती छह घंटों में भूतल से लेकर चौथी मंजिल तक की आग पर काबू पा लिया गया था, लेकिन बेसमेंट-1 और बेसमेंट-2 में केमिकल और प्लास्टिक के दाने होने के कारण आग लगातार सुलगती रही। पानी पहुंचाने के लिए जेसीबी से छह गड्ढे खोदे गए, जिसके बाद बेसमेंट तक पानी पहुंचाकर आग बुझाई गई। दूसरे बेसमेंट के बंद होने से दमकल कर्मियों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा।
आग बुझाने के अभियान में 96 दमकलकर्मियों और 32 दमकल गाड़ियों को लगाया गया। कड़ी मशक्कत के बाद शुक्रवार रात आग को पूरी तरह नियंत्रित कर लिया गया।
बताया जा रहा है कि करीब 400-400 वर्गमीटर के दो भूखंडों पर बनी इस फैक्ट्री में दो मंजिल का बेसमेंट भी है। स्थानीय लोगों ने रिहायशी इलाके में बेसमेंट में फैक्ट्री संचालन और भवन का नक्शा पास किए जाने को लेकर संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं।
