केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में भारतीय सेना अपने ड्रोन योद्धाओं को आधुनिक युद्ध के लिए तैयार कर रही है। ड्रोन संचालन में दक्ष ये सैनिक उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निगरानी, टोही, रसद आपूर्ति और सटीक मारक प्रहार जैसे अभियानों में दुश्मन पर भारी पड़ेंगे।
सेना ने लेह में ड्रोन योद्धा प्रतियोगिता आयोजित कर स्पष्ट संदेश दिया कि अग्रिम इलाकों में सेना की ऑपरेशनल क्षमता बढ़ रही है। आपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान के ड्रोन स्वार्म अटैक को नाकाम बनाने के अनुभव के बाद जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में ड्रोन और ड्रोन रोधी अभ्यास तेज कर दिए गए हैं। इस प्रतियोगिता में फायर एंड फ्यूरी कोर के कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने सैनिकों की दक्षता और तकनीकी कौशल का निरीक्षण किया।
प्रतियोगिता के दौरान सैनिकों ने दुर्गम भूभाग और कठिन जलवायु में ड्रोन संचालन का प्रदर्शन किया। इसमें शामिल रहे कौशल हैं:
- वास्तविक समय में दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी
- लक्ष्य ट्रैकिंग और मिशन सिमुलेशन
- दुर्गम इलाकों में निगरानी और टोही
- उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में ड्रोन से रसद पहुंचाना
- दुश्मन के ठिकानों पर सटीक प्रहार
सेना का उद्देश्य ड्रोन संचालन के माध्यम से अपने सैनिकों को आधुनिक युद्ध के लिए पूरी तरह सक्षम बनाना है। लद्दाख जैसे ऊंचे हिमालयी क्षेत्रों में ड्रोन तकनीक का इस्तेमाल न केवल सैनिकों की सुरक्षा बढ़ाता है, बल्कि दुश्मन के किसी भी साजिश को समय पर नाकाम करने में मदद करता है।
सशस्त्र सेनाओं में ड्रोन और ड्रोन रोधी क्षमताओं को बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर अभ्यास और प्रशिक्षण चल रहा है। आपरेशन सिंदूर की सफलता के बाद यह कदम भविष्य के संघर्षों में सेना की ताकत बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
