अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच हिंद महासागर क्षेत्र में भू-राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इस बीच ईरान ने अपने नौसैनिक युद्धपोत आईआरआईएस लावान को कोच्चि बंदरगाह पर तकनीकी सहायता और रसद सुविधाएं देने के लिए भारत सरकार का आभार व्यक्त किया है।
भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथली ने इस सहायता के लिए भारतीय अधिकारियों और स्थानीय प्रशासन की सराहना की। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में भारत ने मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए ईरानी जहाज और उसके चालक दल को जरूरी सहयोग प्रदान किया है। उनके अनुसार, कोच्चि में युद्धपोत को सुरक्षित रूप से डॉक करने और तकनीकी मदद देने में भारतीय अधिकारियों का समन्वय सराहनीय रहा।
फथली ने बताया कि आईआरआईएस लावान को तकनीकी जांच और लॉजिस्टिक व्यवस्था के लिए कोच्चि लाया गया है। यहां जहाज की मरम्मत और चालक दल की जरूरतों का ध्यान रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस सहयोग से भारत और ईरान के बीच लंबे समय से चले आ रहे मित्रतापूर्ण संबंधों की झलक मिलती है।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब ईरान का एक अन्य युद्धपोत आईआरआईएस डेना हाल ही में श्रीलंका के तट के पास डूब गया था। ईरान का दावा है कि इस जहाज पर अमेरिकी पनडुब्बी ने टॉरपीडो से हमला किया था, जिससे वह समुद्र में डूब गया। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है।
ईरानी राजदूत ने कहा कि तेहरान और नई दिल्ली के बीच ऐतिहासिक और मजबूत संबंध हैं, जो आने वाले समय में और गहरे होंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देश विभिन्न क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाते रहेंगे।
साथ ही, फथली ने अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की कड़ी आलोचना भी की। उन्होंने कहा कि यह हमला केवल ईरान पर नहीं बल्कि अंतरराष्ट्रीय कानून और मानवीय मूल्यों पर भी हमला है। उनके अनुसार मौजूदा हालात न्याय और अन्याय के बीच संघर्ष जैसे हैं, जिसमें एक ओर मानव गरिमा और न्याय की बात है, जबकि दूसरी ओर सैन्य आक्रामकता और दमन देखने को मिल रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते क्षेत्रीय तनाव के बीच भारत द्वारा दी गई यह सहायता उसकी संतुलित कूटनीति और मानवीय दृष्टिकोण को दर्शाती है। इससे भारत और ईरान के संबंधों में भरोसा और सहयोग की भावना और मजबूत हो सकती है।
