बलिया के अठिलापुरा गांव के बीएसएफ जवान अखिलेश सिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर पहुंचने पर शोक छा गया। ड्यूटी के दौरान बीमार होकर उनका निधन हुआ। राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ। परिवार में मां, पत्नी व दो बेटियां हैं। क्षेत्र में लगातार जवानों की मौत से गहरा दुख है।
बलिया के रसड़ा क्षेत्र के अठिलापुरा गांव में उस समय माहौल गमगीन हो गया जब सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवान अखिलेश सिंह का पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपटकर शनिवार को रसड़ा पहुंचा। वीर सपूत के अंतिम दर्शन को लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। युवाओं ने बाइक रैली निकालकर तिरंगा यात्रा के साथ अखिलेश सिंह को भावभीनी श्रद्धांजलि दी। भारत माता की जय और अखिलेश अमर रहें के नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा।
अखिलेश सिंह वर्ष 2013 में गोरखपुर केंद्र से बीएसएफ में भर्ती हुए थे और वर्तमान में पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी में तैनात थे। ड्यूटी के दौरान 9 अप्रैल 2026 को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर सुनते ही पूरे अठिलापुरा गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
जवान का अंतिम संस्कार बलिया गंगा तट पर पूरे राजकीय सम्मान के साथ किया गया। मुखाग्नि बड़े भाई अवधेश सिंह ने दी। इस दौरान सांसद प्रतिनिधि रजनीश राय, पूर्व ब्लाक प्रमुख प्रतिनिधि सतीश सिंह, ग्राम प्रधान दिनेश राजभर, पवन सिंह, विजय शंकर यादव, जयप्रकाश यादव समेत हजारों की संख्या में लोगों ने उपस्थित होकर श्रद्धांजलि अर्पित की।
अखिलेश सिंह के परिवार में बूढ़ी मां गोमती देवी, पत्नी रोली सिंह और दो नन्हीं बेटियां—नैंसी (10 वर्ष) व नित्या (4 वर्ष)—पीछे रह गई हैं। परिजनों के विलाप से माहौल भावुक हो उठा और उपस्थित हर व्यक्ति की आंखें नम हो गईं।
गौरतलब है कि एक सप्ताह के भीतर क्षेत्र के तीन जवानों—प्रधानपुर निवासी रणजीत यादव, अनिल कुमार गुप्ता और अब अठिलापुरा के अखिलेश सिंह—के निधन से समूचा रसड़ा क्षेत्र शोक में डूबा है। अखिलेश सिंह हाल ही में 15 दिन की छुट्टी बिताकर 5 अप्रैल को ही ड्यूटी पर लौटे थे। क्षेत्र में हर जुबां पर यही बात थी—देश ने एक सच्चा सपूत खो दिया।
















