नए वर्ष के शुरुआती महीनों से मरीजों को यह सुविधा मिलनी शुरू हो जाएगी। शासन ने हीमोग्लोबिन डिसऑर्डर से जुड़ी बीमारियों और उनके कारणों की जांच के लिए अनुमति दे दी है।
इस जांच की सुविधा शुरू होने से मरीजों और उनके परिजनों को अब निजी अस्पतालों या दिल्ली की प्रयोगशालाओं में जाकर महंगी जांच कराने की जरूरत नहीं पड़ेगी। अस्पताल में मशीन स्थापित होने के बाद प्रबंधन की जिला अस्पताल नोएडा के साथ एमओयू करने की योजना है, ताकि गर्भवती महिलाओं की जांच कर गर्भ में पल रहे शिशु में संभावित बीमारी का भी समय रहते पता लगाया जा सके।
संस्थान में तैनात वैज्ञानिक डॉ. दिनेश साहू और पैथोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. ज्योत्सना मदान अत्याधुनिक मशीन के माध्यम से जल्द ही मरीजों को जांच की सुविधा उपलब्ध कराएंगे। हाल ही में संस्थान के निदेशक प्रो. डॉ. अरुण कुमार सिंह ने चिकित्सकों के साथ बैठक कर इस जांच सेवा को जल्द शुरू करने की रणनीति को अंतिम रूप दिया।
डॉक्टरों का कहना है कि कई बार नवजात या छोटे बच्चों में खून न बनने की समस्या सामने आने पर अभिभावक बेहद चिंतित हो जाते हैं। नई जांच सुविधा शुरू होने से बीमारी की समय रहते पहचान और उपचार में काफी मदद मिलेगी।
